भारत के 47वें मुख्य न्यायाधीश बने जस्टिस एस. ए. बोबडे

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  • राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जस्टिस बोबडे को चीफ जस्टिस पद की शपथ दिलाई।
  • जस्टिस एसए बोबडे 23 अप्रैल 2021 को रिटायर होंगे
  • जस्टिस बोबडे 2012 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला था

नई दिल्ली: जस्टिस शरद अरविंद बोबडे ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के 47वें मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ ली। उन्होंने 17 नवंबर को सेवानिवृत्त हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की जगह ली। जस्टिस बोबडे का कार्यकाल 17 महीनों का है। वे 23 अप्रैल 2021 में रिटायर होंगे। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें शपथ दिलाई।

जस्टिस बोबडे का जन्म 24 अप्रैल 1956 में महाराष्ट्र के नागपुर में हुआ था। उन्होंने नागपुर यूनिवर्सिटी से ही कानून की डिग्री ली। वे 2000 में बॉम्बे हाइकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त हुए थे। फिर 2012 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला। अप्रैल 2013 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति दी गई। जस्टिस बोबडे पूर्व सीजेआई गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए बनी समिति में शामिल थे।

जस्टिस बोबडे को बाइक राइडिंग का शौक

जस्टिस बोबडे के करीबी बताते हैं कि वे बहुत ही खुशमिजाज और मृदुभाषी हैं। उन्हें बाइक राइडिंग और डॉग्स बहुत पसंद हैं। उन्हें खाली समय में किताबें पढ़ना पसंद है। वे घर पर बेहद सादगी से रहते हैं और यही सादगी उनकी हर जगह देखने को मिलती है।

पूर्व चीफ जस्टिस गोगोई का कार्यकाल 13 महीने 15 दिन का रहा

पूर्व चीफ जस्टिस गोगोई ने 3 अक्टूबर 2018 को 46वें मुख्य न्यायाधीश पद के रूप में शपथ ली थी। उनका कार्यकाल 13 महीने 15 दिन का रहा। जस्टिस गोगोई ने अपने कार्यकाल में कामाख्या देवी के दर्शन के लिए दो बार गए। उन्होंने अयोध्या विवाद पर ऐतिहासिक फैसला दिया। राफेल मामले में पुनर्विचार याचिका खारिज की। चीफ जस्टिस को आरटीआई के दायरे में शामिल किया।

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